धीमा जहर सिर्फ जहर नहीं बल्कि उन लोगों का प्रतीक है जो मीठी बातों के पीछे छिपकर धीरे – धीरे हमारा आत्मविश्वास, खुशी और मानसिक शांति छीन लेते हैं। यह कविता ऐसे रिश्तों और लोगों को पहचानने तथा उनसे दूर रहने का संदेश देती है।
जिस तरह पौधे को
फलने- फूलने, बढ़ने के लिए
हवा, रोशनी के साथ- साथ
अच्छे माहौल की जरूरत होती है
उसी तरह इंसान को भी
आगे बढ़ने, कुछ करने के लिए
बेहतर जिंदगी जीने के लिए
अच्छे इंसानों की ,अच्छे माहौल की
जरूरत होती है।
एक तरह के इंसान वो होते हैं
जो पौधों को जीवित रखने के लिए
खाद,पानी ,अच्छा माहौल देते हैं
और पौधा फलता- फूलता है
ताजी हवा देता है।
और एक तरह के इंसान वो होते हैं
जो पौधों को रोज पानी देते हैं
समय- समय पर खाद भी देते हैं
मगर पानी में थोड़ा सा जहर मिला देते हैं
वह पौधा धीरे- धीरे मुरझाने लगता है
‘ कमी मेरे अंदर है’ सोचते- सोचते
खुद को कोसते- कोसते वह पौधा
एकदिन मर जाता है।
हमारी जिंदगी में भी
कुछ लोग ऐसे ही होते हैं
जो सामने से हमारा हाथ तो पकड़ते हैं
पर पीछे से टांग खींचते हैं
ऊपर से हमें दिखाते हैं कि उनसे बड़ा
कोई शुभचिंतक नहीं है
पर पीठ- पीछे छुरा भोपते हैं।
कुछ लोग ऐसे भी होते हैं
जो बाहरी तौर पर तो
तुम्हारी मदद कर रहे होते है
पर अंदर से मानसिक रूप से
तुम्हें तोड़ रहे होते हैं
तुम्हें कमजोर कर रहे होते हैं
ऐसे लोग धीमे जहर की तरह होते हैं
जिनका जहर दिखता नहीं है
पर धीरे- धीरे तुम्हें खत्म कर देता है
और तुम्हें पता भी नहीं चलता
और तुम अपने- आपको कोसते- कोसते
एक दिन पूरी तरह खत्म हो जाते हो
ऐसे लोगों से दूर रहने की
हरसंभव कोशिश करो
जो तुम्हारी जिंदगी में मीठा जहर घोलकर
तुम्हें मारने की कोशिश करते हैं।
जो तुम्हारी जिंदगी की रोशनी को
धीरे- धीरे कम करते है
तुम्हारी जिंदगी को अंधेरे से भरते है
उन लोगों को अपने दिल के पास रखो
जो तुम्हें तोड़े नहीं, संभाले
जो तुम्हारी असफलताओं पर
तुम्हें हतोत्साहित नहीं करें
बल्कि तुम्हें हिम्मत दें
तुम्हारा हौंसला बढ़ाएं
जो तुम्हारी गलतियों पर ताने नहीं
बल्कि उन गलतियों से सीख लेकर
तुम्हें बेहतर बनाने का हौंसला दें।
क्योंकि तुम भी
उस नाजुक पौधे की तरह हो
जो प्यार मिलने पर खिल उठता है
और धीमा जहर मिले तो
चुपचाप मर जाता है।





