मन में विचारों का सिलसिला
थमता ही नहीं है
उठते- बैठते, चलते- फिरते
सोते- जागते,काम करते हुए
मन में उठते रहते हैं
ढेर सारे सवाल
और उन ढेर सारे सवालों के पीछे
और न जाने कितने
सवालों का सिलसिला शुरू हो जाता है
जो थमने का नाम ही नहीं लेता।
मन परेशान हो जाता है
कल जो हुआ
उसके बारे में सोचकर
कल क्या होगा,उसके बारे में सोचकर
कभी एक छोटी सी बात को पकड़कर
घंटों उसके अर्थ खोजते हैं
जो बात किसी और ने
शायद पल भर में भुला दी
उसे हम अपने मन में
बार- बार दोहराते रहते हैं।
कभी किसी ने तुम्हारे बारे में
कुछ गलत कह दिया तो
तुम्हें लगने लगता है
कि मैं अच्छा इंसान नहीं हूं
कभी असफल हो गए तो
सोचने लगते हैं
मैं कुछ नहीं कर सकता हूं
किसी ने तुममें
जरा सी कमी निकाल दी तो
सोचने लगते हो
मैं कुछ नहीं कर सकता
किसी ने तुम्हारे बारे में
कोई निगेटिव बात कह दी तो
तुम खुद अपनी कमियां
गिनने लग जाते हो
फिर तुम्हें लगता है
मेरी जिंदगी में कोई राह नहीं।
पर ठहरो…
जरा सोचो!
क्या हर विचार सच होता है
क्या मन में पैदा हुआ हर डर
वास्तव में सच होता है?
सच तो यह है कि
यह मात्र हमारे मन का भ्रम है
इसका वास्तविकता से
कोई संबंध नहीं है।
कभी मक्खी पर गौर किया है आपने
वह जहां जाती है
वहीं कमी खोज लेती है
गंदगी ढूंढ लेती है
कितनी भी अच्छी, साफ- सुथरी
जगह पर हो
उसकी नजर कूड़े पर ही रहती है।
और मधुमक्खी को देखो
वह फूलों की ओर जाती है
पर कांटों के बीच भी
मधु की संभावना पाती है।
उसे पता है
हर जगह अच्छाई नहीं मिलेगी
पर जहां मिलेगी
वहीं से खुशियां चुन लेगी।
तो फिर हम क्यों
अपनी जिंदगी के
खराब पलों को गिनते रहें
क्यों गिनते रहें
अपनी गलतियों को
अपनी कमियों को।
तुम खुद से कहो
हां, मुझसे गलतियां हुई हैं
कभी गिरा हूं
कभी टूटा हूं
पर इसका अर्थ यह नहीं कि
मैं हार गया हूं
मेरी जिंदगी खत्म हो गई है।
जिंदगी में मिलने वाली
हर एक ठोकर
हमें बहुत कुछ सिखाकर जाती है
जिंदगी में मिलने वाली
छोटी छोटी असफलताएं भी
हमें बहुत कुछ सिखाती हैं।
अपने मन से कहो –
तू इतना मत सोच
हर बात को दिल पर मत ले
जो बीत गया
परवाह न कर
उसे जाने दे
जो आने वाला है
उसे आने दे।
किसी को मंजिल तक पहुंचने में
संघर्ष करना पड़ता है
तो किसी की राहें
आसान होती हैं
पर तुम दूसरों को नहीं
अपने आप को देखो
तुम्हारी जिंदगी का सफर अलग है
तुम्हारा समय अलग है
तुम्हारी कहानी अलग है
जाहिर है तुम्हारा संघर्ष भी
दूसरों से अलग होगा।
जब मन कहे –
सब खत्म हो गया
तब खुद से कहना
नहीं, एक नया रास्ता
अभी बाकी है।
जब मन कहे
तुम कुछ नहीं कर सकते
तब खुद से कहना
“मैं कोशिश तो कर सकता हूं
और कोशिश करनेवालों की
कभी हार नहीं होती।”
कोशिश करना कि
तुम मन के बस में नहीं
बल्कि मन तुम्हारे बस में रहे
तुम इस चंचल मन की
एक न सुनना
जब मन तुम्हारी कमियां गिनाए
तुम अपनी खूबियों को याद करना
जब मन तुम्हें पीछे खींचे
तुम एक कदम आगे बढ़ना।
बड़ा चंचल है यह मन
न जाने कहां से कहां चला जाता है
इसलिए कहा जाता है
कि मन से विचारों का गहरा रिश्ता है
मन में विचार आते हैं,जाते हैं
तुम अपने मन की हर बात पर
विश्वास मत करना
कुछ विचारों को
बस विचार समझकर
उन्हें गुजर जाने देना।
तुम्हें कचरा चुनने वाली सोच नहीं
बल्कि फूलों से खुशबू चुनने वाली
सोच रखना है
हर परिस्थिति में
कुछ अच्छा खोजने की कोशिश करना है।
क्योंकि जिंदगी
सिर्फ समस्याओं का नाम नहीं
समाधान खोजने का नाम भी है।
जब कभी
विचारों का तूफान
दिल में हलचल मचा दे
थमने का नाम ही न ले
तब बस इतना याद रखना
मन में उठने वाला हर तूफान
सच नहीं होता।
यकीन करो
तुम अब भी वही हो
जिसके भीतर सपने हैं
उम्मीदें हैं
कुछ कर गुजरने की चाह है।
हर पल डर में मत जिओ
जो बीत गया, उसे जाने दो
जो सामने है
उसे दिल से अपनाओ।
बहुत खूबसूरत है यह जिंदगी
बस इसे देखने का नजरिया चाहिए
मक्खी बनकर कमी ढूंढने से बेहतर है
मधुमक्खी बनकर
खुशियां चुनने का हुनर पैदा करो।




