एक छोटे से पौधे की बड़ी सीख ने रामू की सोच को धीरे धीरे बदल दिया था।
रामू किसी बात में पीछे नहीं था। मन लगाकर पढ़ाई करता। बड़ों का आदर करता। सबकी मदद के लिए हमेशा तैयार रहता। परंतु उसकी एक आदत थी, हर बात में शिकायत करने की। कभी किसी चीज में अच्छाई दिखती ही नहीं। हर चीज में बस कमी ही कमी नजर आती। हमेशा शिकायत ही करता रहता।
अगर बारिश हो जाए तो कहता “मौसम बहुत खराब है, कितनी बारिश हो रही है।”
और बारिश नहीं हो तो कहता “कितनी गर्मी है, बारिश होने का नाम ही नहीं ले रही।”
स्कूल में ज्यादा होमवर्क मिल जाए तो कहता”मेरी तो किस्मत ही खराब है। रात को देर से सोए तो बस यही बात”मुझे तो रात को जल्दी से नींद ही नहीं आती।”
सुबह जल्दी उठ जाए तो फिर वही जुमला शुरू हो जाता”मेरी तो नींद ही पूरी नहीं होती।
उसे हमेशा यही लगता कि उसकी जिंदगी में कुछ भी अच्छा नहीं है।
उसकी ऐसी नकारात्मक बातें सुनकर घरवाले परेशान होने लगे। उसकी इस आदत की वजह से उसके दोस्त धीरे धीरे उससे अलग होने लगे।
घरवाले बहुत समझाने की कोशिश करते,”बेटा, हर परिस्थिति में कुछ अच्छा ढूंढना सीखो।”लेकिन रामू तो जैसे अपने आपको बदलना ही नहीं चाहता था। सबकी बातों को एक कान से सुनता दूसरे कान से बाहर निकाल देता।।
एक दिन स्कूल में नए टीचर आए। उन्होंने सब बच्चों को एक-एक पौधे दिए और कहा, जिसका पौधा सबसे अच्छा बढ़ेगा, उसे इनाम मिलेगा।
रामू ने सोचा , यह पौधा थोड़े ही बढ़ेगा। इसलिए वह उसकी तरफ ध्यान ही नहीं देता। बस बेमन से थोड़ा सा पानी डाल देता।
नहीं उसका दोस्त अर्जुन अपने पौधे की अच्छे देखभाल करता। उसे रोज पानी देता, धूप में रखता। और उससे ढेर सारी बातें करता।
कुछ हफ्ते में अर्जुन का पौधा हरा – भरा हो गया। जबकि रामू का पौधा सूखकर बेजान सा दिखने लगा। रामू उसे देखकर बहुत उदास हो गया।
टीचर ने सभी बच्चों को समझाया, पौधे भी उसी तरह बढ़ते हैं, जैसे हमारे विचार। अगर हम हमेशा नकारात्मक सोचेंगे तो हमारा मन भी कमजोर पड़ जाएगा। आत्मविश्वास डगमगा जाएगा। उम्मीदें दम तोड़ती नजर आएंगी लेकिन अगर हम जिंदगी में मेहनत का साथ नहीं छोड़े, उम्मीदों का दामन थामे रखें तो जिंदगी एकदिन जरूर खिल उठेगी।
यह बात रामू के दिल को छू गई। अब उसने छोटी छोटी बातों में खुशी ढूंढना शुरू कर दिया।
अब वह शिकायत करने के बजाय समाधान खोजने लगा। अब वह पहले से ज्यादा खुश रहने लगा था।




