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अलग सोच वाला मेढ़क

अलग सोच वाला मेढ़क प्रेरणादायक हिंदी कहानी

परिचय:-
जीवन में सफलता पाने के लिए केवल मेहनत ही नहीं बल्कि सकारात्मक सोच भी जरूरी है।”अलग सोच वाला मेढ़क”एक प्रेरणादायक हिंदी कहानी है जो सिखाती है कि दूसरों की नकारात्मक बातों पर ध्यान दिए बिना अपने लक्ष्य की ओर लगातार प्रयास करते रहना चाहिए।


अगर आप जीवन में कुछ करना चाहते हैं, कुछ बनना चाहते हैं, सफल होना चाहते हैं तो आपको बहरा बनना होगा। यानि लोगों की बातों को नजरअंदाज करके आगे बढ़ना होगा। क्योंकि यह तो जिंदगी का उसूल है कि जब भी कोई आगे बढ़ता है या बढ़ने की कोशिश करता है तो उसे हतोत्साहित करने की पूरी कोशिश की जाती है।
लोग नहीं चाहते कि आप जिंदगी में आगे बढ़े, कुछ करें, एक कामयाब इंसान बने। इसलिए वह आपके बारे में तरह – तरह की बातें करते हैं। और आप उनकी बातों में आकर मन छोटा करके बैठ जाते हो। आपको लगता है कि शायद आप कुछ नहीं कर सकते। बस यही आपकी सबसे बड़ी गलती होती है कि आप दूसरों की बातों में आकर मन में सोच लेते हो कि मैं यह काम नहीं कर सकता। और बीच में ही प्रयास करना छोड़ देते हो।
चलिए! मैं आपको एक कहानी बताती हूं। इसे पढ़कर शायद आप कुछ मोटिवेट हो सकें। और लोगों की बातों पर ध्यान दिए बिना खामोशी से अपना काम कर सकें।
एक बार पांच मेढ़क जंगल की ओर घूमने जा रहे थे। रास्ते में एक गड्ढा था उसमें तीन मेढ़क गिर पड़े। तीनों मेढ़क जोर- जोर से उछल – उछलकर बाहर निकलने का प्रयास कर रहे थे। ऊपर जो दो मेढ़क थे वह उन्हें देख रहे थे और जोर – जोर से चिल्ला रहे थे अरे! इतना बड़ा गहरा गड्ढा है। तुम नहीं निकल पाओगे। बेकार की कोशिश मत करो। तुम्हारा गड्ढे से बाहर निकल पाना असंभव है। तुम्हारी कोशिश बेकार है। कितना भी उछलकूद कर लो। हाथ – पैर मार लो तुम गड्ढे से बाहर आ ही नहीं सकते।
उनकी बातें सुन- सुनकर एक मेढ़क हताश होकर एक कोने में जाकर बैठ गया। क्योंकि उसे लगने लगा था कि अब उसका गड्ढे से बाहर निकल पाना असंभव है।
दो मेढ़क अब भी उछल – उछलकर बाहर आने की कोशिश कर रहे थे। ऊपर वाले मेढ़क फिर जोर – जोर से चिल्लाने लगे, इस गड्ढे से तुम्हारा निकल पाना असंभव है। तुम व्यर्थ की कोशिश मत करो। वही बैठ जाओ।
बार – बार उनकी एक ही बात सुनकर दूसरा मेढ़क भी हिम्मत हारकर बैठ गया। उसे भी लगने लगा कि इस गड्ढे से बाहर निकल पाना असंभव है। और वह भी एक कोने में दुबककर बैठ गया।
पर तीसरा मेढ़क लगातार उछल – उछलकर ऊपर जाने का प्रयास करता रहा। और ऊपर जो मेढ़क थे वह अब भी बार – बार वही बातें दोहरा रहे थे। पर तीसरा मेढ़क उनकी बातों पर ध्यान दिए बिना लगातार प्रयास करता रहा एवं आखिरकार गड्ढे से निकल ही गया।
पता है वह क्यों अपने प्रयास में सफल रहा क्योंकि वह बहरा था। और उसने उन ऊपर वाले दो मेढ़कों की बात सुनी ही नहीं। वरना वह भी हिम्मत हराकर बैठ जाता। प्रयास करना ही छोड़ देता।
इस कहानी से हमें यह सीख जरूर लेना चाहिए कि हमें कान के कच्चे नहीं बनना है। लोगों की बातों पर ध्यान नहीं देना है।
जो भी करना है पूरी मेहनत और ईमानदारी से करना है। लोग तरह – तरह की बातें करके आपको गिराने की कोशिश करेंगे। पर आपको उनकी बातों को सुनना ही नहीं है। अपना प्रयास जारी रखना है जब तक मंजिल न मिल जाए।



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