गिरगिट की तरह रंग बदलने लोग जीवन में अक्सर अपने स्वार्थ के लिए रिश्ते बनाते और तोड़ते हैं। यह हिंदी कविता ऐसे ही दोहरे चेहरे वाले, मतलबी और नकारात्मक लोगों की सच्चाई को सरल शब्दों में प्रस्तुत करती है।
जो इंसान गिरगिट की तरह
रंग बदलते हैं
कल आपके साथ थे
आज किसी और के साथ
वो कभी किसी के अपने नहीं होते
उनके चेहरे पर एक नया चेहरा
छुपा होता है
वो हरपल अपना चेहरा
बदल लेते हैं
सच और झूठ में फर्क नहीं करते।
जो इंसान मीठा बोलते हैं
ऊपर से तो उनकी बोली में
फूल झड़ते हैं
और अंदर से कड़वाहट भरी होती है
मतलब तक ही रिश्ते निभाते हैं
फिर अंजान बनकर निकल जाते हैं
मीठी बातों का जाल बिछाते हैं
और पीठ पीछे बार कर जाते हैं।
जो इंसानं स्वार्थी होते हैं
ऐसे लोग चेहरे पर
मासूमियत का नकाब रखते हैं
वह तब तक ही आपका साथ निभाते हैं
जब तक उनका कोई स्वार्थ जुड़ा हो
स्वार्थ पूरा होते ही
आपको अपनी जिन्दगी से
दूध में से मक्खी की तरह
निकाल कर फेंक देते हैं।
जो इंसान न कभी किसी के थे
और न कभी किसी के हो सकते हैं
ऐसे लोग बस साथ निभाने के
वादे करते हैं
लेकिन वक्त आने पर
मुकर जाते हैं
जिस थाली में खाते हैं
अक्सर उसी में छेद करते हैं।
ऐसे इंसान जो कभी
आपकी कद्र नहीं करते
आपकी भावनाओं का सम्मान नहीं करते
जिन्हें हमेशा दूसरों में
कोई न कोई कमी नजर आती हो
जिनकी नजरों में
पैसा ही सबकुछ हो
जो इंसान हमेशा
दूसरों को गलत सलाह देता हो
जो दूसरों की तरक्की से जलता हो
जिसे दूसरों के दुख में खुशी मिले
जो हमेशा नकारात्मक बातें करता हो
ऐसे लोग दोस्त नहीं, सबक होते हैं
जो जिंदगी की सच्चाई सिखा जाते हैं
इनसे मिलकर इंसान सीखता है
कि भरोसा हर किसी पर
नहीं किया जाता।
सच्चे लोग कम मिलते हैं
लेकिन दिलों में हमेशा बसते हैं
झूठ का महल
एकदिन ढह जाता है
सत्य का दीप सदा जलता है।
इसलिए सच्चाई का साथ
कभी मत छोड़ो
हमेशा ईमानदार रहो
गिरगिट जैसे लोगों से दूर रहो
जिनके चेहरे पे चेहरा छुपा होता है
ऐसे लोगों से दोस्ती करने से बेहतर है
आप खुद से दोस्ती करो
और अपने चरित्र को अपनी पहचान बनाओ।
समय सबका हिसाब रखता है
इंसान जैसा बोता है
वैसा ही काटता है
रंग बदलने वाले लोग
भले ही चमक जाएं
लेकिन अंत में जीत
सत्य की ही होती है।
यही जीवन का सबसे बड़ा संदेश है
विश्वास जगाओ, धोखा नहीं
रिश्ते दिल से निभाओ, स्वार्थ से नहीं
यही इंसानियत की सबसे सुंदर राह है।





