जो नहीं मिला उसे जाने दो।जिंदगी में हर चीज हमारे हिस्से में नहीं आती। कुछ रिश्ते, कुछ सपने और कुछ उम्मीदें अधूरी रह जाती हैं। लेकिन जो नहीं मिला, उसे पकड़कर बैठना मन को बोझिल बना देता है। उन्हें छोड़ देना ही कभी – कभी सबसे बड़ी समझदारी होती है। आइए पढ़ते हैं इसपर एक कविता-
जो नहीं मिला उसे जाने दो
जिंदगी में हर चीज को
पकड़कर बैठना
कोई समझदारी नहीं है
आपकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए
मन की शांति
आपकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए
दिल की खुशी
आपकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए
जिंदगी का सुकून
गर किसी रिश्ते में रहकर
आपका मन अशांत रहता है
बैचेन रहता है, दुखी रहता है
तो उस रिश्ते से दूरी बना लो
ऐसे रिश्ते को पकड़कर
रखने का फायदा ही क्या
जहां भावनाएं न हों
जहां सम्मान न हो
जहां ईमानदारी न हो
ये रिश्ते आपको सिवाय दर्द के
कुछ भी नहीं दे सकते
इन्हें पकड़कर रखने की जिद मत करो
वरना जिंदगी बोझ बन जाएगी
मानाकि! जिंदगी को लेकर
आपके कुछ सपने हैं
और आपने उन्हें पूरा करने के लिए
पूरी ईमानदारी से प्रयास भी किए हैं
फिर भी आप उन्हें
पूरा नहीं कर पा रहे हैं
तो समझ लो
वह सपने अब आपके नहीं हैं
उन्हें दिल से मुक्त कर दो
जो यादें, जो बातें
आपके मन को बोझ लगें
उन्हें उड़ जाने दो
हवा के संग
अपनों से की गई उम्मीदें
जो पूरी नहीं हो पाती
फिर भी आप उन्हीं से
उम्मीद लगाए बैठे रहते हैं
और अपने दिल को
ठेस पहुंचाते हैं
छोड़िए! दूसरों से उम्मीद करना
उम्मीद खुद से करो, दूसरों से नहीं
उन रिश्तों को, उन बातों को
उन यादों को
उन उम्मीदों को
तुम पकड़कर नहीं बैठ सकते
जो तुम्हारी खुशी में बाधा बनते हैं
तुम उन्हें छोड़ना सीखो
उन्हें छोड़ देने में ही
तुम्हारी समझदारी है।
इसलिए अपने- आप से कहिए
जो नहीं मिला उसे जाने दो।





