
तुम अतीत हो न !
बीता हुआ कल
मुझे डर लगता है तुमसे
मैं नहीं आना चाहती तुम्हारे पास
दूर भाग जाना चाहती हूं तुमसे
फिर तुम क्यों
मेरे पीछे पड़े हुए हो
जब मैं तुमसे
दोस्ती करना ही नहीं चाहती
आखिर करूं भी क्यों
तुम मेरे उस वर्तमान को
बर्बाद करना चाहते हो
जिसके सहारे
मैं अपना कल संवारना चाहती हूं।
तुम क्यों बुलाए मेहमान की तरह
मेरे दिल के दरवाजे पर
दस्तक देते हो
अब जब मेरे मन के
समुंदर की लहरें
कुछ थमने सी लगी हैं
तुम क्यों तूफान बनकर
आ जाते हो
हलचल मचाने के लिए।
तुम्हारी वो धुंधली यादें
तुम्हारे साथ बिताए वो पल
मेरा वो रोना, वो सिसकना
और गिड़गिड़ाकर कहना
तुम चले जाओ
मेरी जिंदगी से
मैं कुछ भी याद नहीं करना चाहती।
साया बनकर मेरी जिंदगी में आना
मुझे दुखी, उदास टूटा हुआ देखकर
तुम्हारा वो जोर से खिलखिलाना
मैं कुछ भी याद नहीं करना चाहती
हां, कुछ भी नहीं।
तुम्हारी यादों में सिमटकर
मैं अपनी मंजिल का
रास्ता भटक जाती हूं
जिंदगी जीने का मकसद
भूल जाती हूं
दिशाहीन लगने लगती है ये जिंदगी।
तुम्हारा हाथ थामकर
क्या मिला है मुझे
दुख, निराशा और तन्हाई के सिवा।
सुनो अतीत! अब मेरी जिंदगी में
तुम्हारे लिए कोई जगह नहीं है
और तुम मेरी जिंदगी में
दोबारा जगह बनाने की
कोशिश करना भी मत।
तुम तो जानते हो न!
मैं अब वैसी नहीं रही
जैसी पहले थी
अब मैंने दर्द में भी
मुस्कुराना सीख लिया है
अब मैंने टूटकर भी
खुद को फिर से जोड़ना सीख लिया है।
और अब मैं
अपने आने वाले कल को
तुम्हारी परछाइयों के भरोसे नहीं छोड़ सकती
क्योंकि मैं जानती हूं
कि अगर मैंने फिर से
तुम्हारा हाथ थाम लिया
तो तुम मुझे फिर से वही पर
ले जाकर खड़ा कर दोगे
जहां पर मैं पहले थी।
तुम्हारा हाथ थामकर
अब मैं नहीं जीना चाहती
दुख, दर्द, उदासी, निराशा
और तन्हाई के बीच में ।
अब मैं उम्मीदों में जीना चाहती हूं
अपने आने वाले कल को
खूबसूरत बनाना चाहती हूं
कुछ नए सपने सजाना चाहती हूं
कुछ अधूरी ख्वाहिशों को
पूरा करना चाहती हूं।
मैं चाहती हूं
कि एक दिन जब मैं
पीछे मुड़कर देखूं
तो मुझे अपने टूटने का नहीं
खुद को संभाल लेने का गर्व हो।
मुझे अब तुम्हारे साथ नहीं
बल्कि वर्तमान में जीना है
और अपने आने वाले कल को
बेहतर बनाना है।
और इस बार मैं
रुकूंगी नहीं
टूटूंगी नहीं
पीछे मुड़कर नहीं देखूंगी।
इसलिए तुम
अब लौट जाओ अतीत
क्योंकि तुम्हारे लिए
अब मेरी जिंदगी में
कोई जगह नहीं रही।




